Disease X: वैश्विक सुरक्षा की गंभीर चुनौती- डॉ.शान्तेष कुमार सिंह


पिछले महीने प्रकाशित विश्व स्वास्थ्य संगठन की सामरिक और तत्परता रिपोर्ट, जो “२०१८ के शोध और विकास का खाका”, के नाम से भी जाना जाती है, में एक नए संक्रामक रोग की पहचान की गई हैं जो कि सम्पूर्ण विश्व की लिए एक गंभीर खतरे के रूप में सामने आया हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह रहस्यमयी रोगजनक संक्रामक बीमारी है, जिसका मूल कारण अभी तक सामने नहीं आया है. इसको पहले, ‘ज्ञात अज्ञात महामारी  (Known Unknown)’, के रूप में पहचाना गया था जो की अब Disease X के नाम से जाना जायेगा. इसको ये नाम विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दिया है. इसकी उत्पत्ति का कारण जैविक परिवर्तन हो सकता है जैसे स्पैनिश फ्लू या HIV. इसकी विशेषताएँ ठीक उसी तरह की हैं जैसे १०० साल पहले स्पैनिश फ्लू महामारी थी. इसके अन्दर भयानक विनाशकारी क्षमता उपलब्ध हैं जो की सम्पूर्ण वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली को ख़तम या विफल कर सकता है. इसके अन्दर पूर्ववर्ती सभी महामारियों के गुण देखें जा सकते हैं जैसे ४३० BC का एथेंस में आया प्लेग, १३४७ का ब्लैक डेथ, १८१७ का कोलेरा महामारी, या फिर १९१८ का स्पेनिश फ्लू और तत्काल में फैली इबोला महामारी. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने DISEASE X को विश्व की अन्य “आठ प्राथमिक महामारियों की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली सूची” में शामिल कर लिया हैं. जिसमे कुछ प्रमुख रूप से जाने जाते है Crimean-Congo haemorrhagic fever (CCHF), Ebola virus disease and Marburg virus disease, Lassa fever, Middle East respiratory syndrome coronavirus (MERS-CoV) and Severe Acute Respiratory Syndrome (SARS), Nipah and henipaviral diseases, Rift Valley fever (RVF) and Zika. ये वो बीमारियां  है जिन्होंने सम्पूर्ण विश्व की स्वास्थ्य प्रणाली को हिलाकर रख दिया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इन बीमारियों पर जादा शोध, निगरानी और परिक्षण करने पर जोर देने की बात कही हैं. 

Disease X की सबसे बड़ी समस्या इसके उत्पत्ति के श्रोत का पता लगाना हैं जो कि अभी तक वैज्ञानिको के समझ से परे हैं. ये विभिन्न श्रोतो से अलग-अलग स्थान और समय पर उत्पन्न हो सकता हैं. वैश्विक सुरक्षा के लिहाज़ से ये बड़ा चिंता का विषय है क्योंकि ये बहुत ही कम समय में ही जानमाल का अधिकाधिक नुकसान पंहुचा सकती हैं . इतना ही नहीं इससे प्रवसन और अस्थिरता को भी गति मिलेगा जो सम्पूर्ण विश्व को अस्थिर कर देगा. यह चिंता का विषय इसलिए भी है क्योंकि ये मानवकृत भी हो सकता है जो कि आतंकवादी संगठनों के लिए एक गंभीर हथियार होगा. John-Arne Rottingen, विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैज्ञानिक सलाहकार, ने कहा की इसको मानवजाति पर अगले महामारी के रूप में देखा जाना चाहिए जैसा कि अतीत में कभी भी नहीं हुआ. यह २००९ में फैले स्वाइन फ्लू की तरह जानवर से मनुष्यों में फ़ैल सकता हैं और उससे भी अधिक विनाशकारी साबित हो सकता है. संयुक्त राष्ट्र संघ, अन्य संगठनों और राष्ट्रों के साथ मिलकर इस उभरते नव वैश्विक खतरे पर लगाम लगाने की कोशिश करना चाहिए. क्योंकि ऐसे किसी भी महामारी पर कोई राष्ट्र अकेले ही लगाम नहीं लगा सकता है इसके लिए वैश्विक स्तर पर ही प्रयास किया जाना चाहिए. वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली को बिना भेदभाव के मजबूत बनाया जाना चाहिए. विकसित राष्ट्रों को अल्प- विकसित राष्ट्रों का मदद करना चाहिए जिससे महामारी की पहचान जड़ पर ही कि सके और उसको फैलने से रोका जा सके. इसके लिए जनता में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाये जाने चाहिए जिससे लोग सजग रहकर इस तरह के किसी संक्रामक बीमारी से अपनी रक्षा कर सके. 

इस तरह के संक्रामक बीमारी से भारत अछूता नहीं रह सकता हैं, जहाँ पर विश्व के संपूर्ण जनसंख्या का लगभग १८% जनसंख्या निवास करती हैं . भारत सरकार को स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने की जरुरत हैं जिससे वो इस तरह के किसी भी आपातकाल के लिए तैयार रह सके . भारत की वर्तमान स्वास्थ्य   प्रणाली बहुत ही बुरे आकार में है जो Disease X जैसी किसी भी जानलेवा संक्रामक बीमारी से बचने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. भारत को विश्व की बहुराष्ट्रीय संगठनों के साथ साथ, अन्य देशों के साथ भी द्विपक्षीय स्तर पर काम करने की जरुरत है. जिससे भारत अपने नागरिकों की रक्षा कर सके और होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके . इसके लिए संक्रामक बिमारियों की, विश्वसनीय और व्यापक सूचना की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके, जो की अभी तक के पूर्ववर्ती समय में फैले महामारियों के दौरान अनुपलब्ध रहा हैं. इससे भारत जैसे देश अतीत में, प्लेग जैसी बीमारियों से बहुत नुकसान उठाये है और यह नुकसान मानवीय जीवन खोने के अलावा आर्थिक भी रहा हैं . इस तरह की महामारियों के फैलने से आर्थिक प्रणाली मंद पड जाती है जिससे लोगो का प्रवसन शुरू हो जाता है. इस तरह की अस्थिरता किसी भी देश के लिए सुरक्षा की दृष्टि से घातक सिद्ध होता है. ऐसा Eboba, Chagas, MERS and Zika जैसी महामारियों के दौरान देखा जा चुका हैं. इसका अनुभव मध्य पूर्व एशिया और अफ्रीका के देश, चीन, हांगकांग और दक्षिण पूर्व के देशो में बखूबी किया जा चुका है. भारत को ऐसी किसी भी महामारी से बचने के लिए एक सशक्त स्वास्थ्य प्रणाली बनाने की जरुरत हैं. संक्रामक बीमारी से होने वाले नुक्सान को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए सभी क्षेत्रों से जुड़े विषेशज्ञों का सलाह लिया जाना चाहिए. 

भारत को विश्व के अन्य देशों के साथ मिलकर अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमन (IHR) को और मजबूत बनाने की कोशिश करनी चाहिए जिससे इस समस्या का समाधान वैश्विक स्तर पर हो सके. ऐसी समस्या का समाधान सतर्कता और संसाधनों का उचित प्रयोग करके ही हो सकता हैं. सूचना का उचित समय पर आदान-प्रदान  ही ऐसी महामारी से संपूर्ण विश्व में मानव जाति का सुरक्षा कर सकता है इसके लिए किसी अन्य हथियार या रक्षा प्रणाली का प्रयोग नहीं किया जा सकता हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपने सतत विकास के १७ लक्ष्यों में स्वास्थ्य को तीसरा प्रमुख लक्ष्य बनाया है जो इसकी प्राथमिकता को दर्शाता हैं. संयुक्त राष्ट्र के सभी राष्ट्रों से इसे हासिल करने की उम्मीद की गई है जो कि सामूहिक प्रयास से ही संभव हैं. अगर ऐसा होता है तो इससे सभी देश आपसी सूझबूझ से Disease X जैसी किसी बीमारी से समय रहते निपट लेंगे, जो सभी के हित में भी होगा. 



वर्तमान में, वैश्विक स्वास्थ्य के लिए अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय (UNU-IIGH), कुआलालम्पुर, मलेशिया में कार्यरत हैं. 
E-mail; shanteshjnu@gmail.com, twitter; @shanteshjnu

Comments